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Review Rajnagar Reloaded From Rajnagar Rakshak Series

 Review - Rajnagar Reloaded 
 Rajnagar Rakshak Series | Raj Comics 


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Review-Rajnagar-Releaded----Pic-1My Ratings: 3.5 

RC Official Rating: N/A 





Sr.No/Code: SPCL-2608-H
ISBN: 9789332427105
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Stuti Mishra
Penciler: Hemant Kumar
Inker: Ishwar Art, Vinod Kumar, Swati
Colorist: Bhakta Ranjan, Sunil Dusturiya
Pages: 64
Price: Rs. 60/-





Rajnagar Reloaded the fourth part of Rajnagar Rakshak Series have not even realized when it came and gone. This comic did not drop as much impact as I was expecting from it. Dhruv starrer comics usually impress the readers, but I think this comic have failed to leave much impression. Why so? We will try to find out the answer in this review.



Review Rajnagar Reloaded:

Let's start with the story. In this part, the story has overcome the doubts and dilemmas of the readers. After reading Rajnagar Reloaded is now easy to understand the story. Past and present together in the ongoing story became complicated, which is sorted by now in this part. Now we can say that the series is towards its end, at most 1 or 2 more comics will be released. Only at one condition, if a new twist in the story will not be added. And that new twist which we had seen on the last page, I mean the second Dhruv. I think it is the weapon created by protoplast, which can eliminate the unknown machine power. The same power which had destroyed the planet of Protoplast and now trying to destroy the earth using Inspector Steel.

The artwork is just okay. A few frames of some pages are good, but not much impressive. Inking and coloring are OK. But even that, will have to say that the overall artwork of this comic is not up to the mark. The artwork does not look more impressive, probably one reason for this is that Dhruva's fans love the Dhruv composed by Anupam Sir. But still need to pay more attention to the artwork.

Dialogues are simple but good, empathic and impressive. Raj Comics Team have tried to make the story more entertaining by adding light jokes and humor to the story and they had succeeded in it.



The Downsides of Rajnagar Reloaded:

  • Page 9, Natasha says that these Drones are not made of live metal, so our lead mixed weapons (bullets and bombs) are useless on them. But in the very next scene, Dhruv destroys these drones just with a star blade. When Dhruv could do that using his star blade, then why Natasha and Salma could not do this using bullets and bombs. Their weapons are original and they can harm the drones, doesn't matter if lead is mixed, or not.
  • Page number 10, entry of Dhruva. Have you noticed something on this page? Look at the costume of Dhruv, on the back and of both the shoulders the costume is shown torn. But in every scene after this page, the costume is absolutely safe and sound. Is not torn from anywhere. Here is the slightest mistake in the drawing by the artist.
  • Page 46 frame number 3, in this scene you can see the red color on Steel's body. If it is blood, then this is a huge mistake. Because except the brain of steel, all other parts of his body are made of steel. In such, steel is bleeding, it is beyond thinking.

Positive Sides of Rajnagar Reloaded:

  • The story is fresh and interesting. Dialogues are vigorous and good.
  • The concept of "Live Metal Humanoids" and "Machines Rule Over Humans" is great so far. Now it will be interesting to see how the author leads it to the final destination.


So this was the fourth installment of Rajnagar Rakshak Series. If you have read the previous parts, then you should also read the comic. You can buy it from raj comics online store, by visiting www.rajcomics.com. Go ahead, read it and must share your views with us.




Read the Review of the Previous Part 'Rajnagar Reboot': 

Review - Rajnagar Reboot

हिंदी के लिए नीचे देखें
 Scroll Down to Read in Hindi

Review-Rajnagar-Releaded----Pic-2


राजनगर रीलोडेड, राजनगर रक्षक श्रृंखला की चौथी कड़ी आई और आकर चली गयी। यह कॉमिक उतना ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पायी, जितना मैं इससे उम्मीद कर रहा था। यह पाठकों को उतना प्रभावित नहीं कर पायी, जितना कि ध्रुव की कॉमिक्स आमतौर पर करती हैं। ऐसा क्यों? यही जानने की कोशिश करेंगे हम आज इस समीक्षा में।

समीक्षा - राजनगर रीलोडेड । राजनगर रक्षक श्रृंखला

बात करें कहानी की, तो इस भाग में कहानी ने पाठकों की काफी सारी शंकाओं और दुविधाओं को दूर किया है। राजनगर रीलोडेड पढ़ने के बाद, अब कहानी को समझने में आसानी हो रही है। भूतकाल और वर्तमान में साथ साथ चल रही कहानी पेचीदा हो गयी थी, जोकि अब जाकर सुलझी है। हम ये कह सकते हैं की श्रंखला अब समाप्ति की ओर है, ज़्यादा से ज़्यादा 1 या फिर 2 भाग और आने बाकी हैं। बशर्ते की कहानी में कोई और नया ट्विस्ट न डाल दिया जाये तो। और ये जो नया ट्विस्ट आया है यानि की दुसरा ध्रुव, मेरे ख्याल से यह प्रोटोप्लास्ट द्वारा बनाया गया वो हथियार है जो अज्ञात मशीनी ताकत को ख़त्म कर सकता है। वही ताक़त जिसने प्रोटोप्लास्ट के गृह का विनाश किया था और अब स्टील के माध्यम से पृथ्वी को भी तबाही की और ले जा रही है।

आर्टवर्क बस ठीक-ठाक है। कुछ पृष्ठों के कुछ फ्रेम अच्छे बने है, लेकिन बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं। इंकिंग और रंगसज्जा ठीक है। लेकिन फिर भी यह कहना होगा कि कुल मिलकर आर्टवर्क राज कॉमिक्स के स्तर का नहीं है। आर्टवर्क के बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं लगने का एक कारण यह भी है की, ध्रुव के प्रशंसकों को अनुपम जी द्वारा रचित ध्रुव ज़्यादा पसंद आता है। लेकिन फिर भी आर्टवर्क पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

संवाद सरल लेकिन अच्छे हैं, जोरदार और प्रभावशाली हैं। कहानी में हल्का-फुल्का हास्य डालकर कहानी को और अधिक मनोरंजक बनाने की कोशिश की है, और राज कॉमिक्स टीम इसमें सफल भी रही है।

नकारात्मक पहलु:

  • पृष्ठ 9, नताशा कहती है की ड्रोन्स लाइव मेटल से नहीं बने हैं और हमारे लैड मिश्रित गोलियां और बम  इन पर बेकार हैं। लेकिन अगले ही दृश्य में ध्रुव इन ड्रोन्स को केवल एक स्टार ब्लेड से चकनाचूर कर देता है। जब ध्रुव अपने स्टार ब्लेड से ऐसा कर सकता है तो नताशा और सलमा गोलियां और बम्बों से क्यों नहीं !!! अरे भाई हैं तो वह असली हथियार ही न।
  • पृष्ठ संख्या 10, ध्रुव की एंट्री। ज़रा ध्रुव की कॉस्ट्यूम पर ध्यान दिजिये, कॉस्ट्यूम दोनों कंधों और पीठ पर से कटी-फटी हुई है। लेकिन इस दृश्य के बाद के हर दृश्य में कॉस्ट्यूम बिलकुल सही सलामत है, कहीं से भी कटी-फटी नहीं है। यहाँ चित्रकारी में चूक हुई है।
  • पृष्ठ 46 फ्रेम संख्या 3, इस दृश्य में स्टील के शरीर पर जो लाल रंग दिख रहा है, अगर वो खून है तो ये एक बहुत बड़ी गलती है। क्योंकि स्टील के दिमाग को छोड़कर उसके शरीर के बाकी सभी अंग स्टील के बने हैं। ऐसे में, स्टील के शरीर से खून बहना, सोच से परे है।

सकारात्मक पहलु:

  • कहानी ताजा-तरीन है, अच्छी है। संवाद जोरदार और बढ़िया हैं।
  • "लाइव धातु हुमनोइड्स" और "इंसानों पर मशीनों की  हकूमत" की संकल्पना अब तक बढ़िया रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा की लेखक इसे अंतिम गंतव्य तक कैसे पहुंचाता है।


तो यह थी राजनगर रक्षक श्रंखला की चौथी किस्त। अगर आपने इस श्रंखला के पिछले भागों को पढ़ा है, तो आपको यह कॉमिक भी पढ़नी चाहिए। आप राज कॉमिक्स के ऑनलाइन स्टोर से इसे खरीद सकते हैं। www.rajcomics.com पर जाएं और आर्डर करें। राजनगर रीलोडेड पड़ने के बाद अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें।



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