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Too Much Comics Series Good or Bad?

Raj Comics Series

Too Much Comics Series Good or Bad?


Comics world is enjoying the springtime of "Comics Series" these days. Or either you can say it has become more crowded. Leading Indian comics publisher Raj Comics are introducing spectacular "Comics Series" one by one.  
Form the last two years Raj comics has been focused on "comics series". Many comics series have been published so far, and the figure is increasing gradually. In 2013 and after- Aatankharta Nagraj (Veergati), City Without a Hero, Narak Nashak, Sarvnayak, Nagayana Upsanhar, Balcharit etc were published. Most of these are still ongoing. Then now in 2015-  Rajnagar Rakshak, Sarvnayak Vistaar, Aakhiri Rakshak, Doga Nirmulk and Kshatipurti. In queue with all of these some upcoming comics series- Swamibhakt Rakhwaale, Shaktiroopa, Naag Granth, Shudhikaran, Mahanagayan etc.

I do not mean to say, should not be published these over numbered comics series. But I want to say to be published in a certain-way. So that all these series will be complete by the time. The continuous publication of new comics series shouldn't be the  cause of delay in completion of the ongoing comic series. As is happening right now. 

Take the example of Sarvnayak Series- First comics of this series was "Yugandar" released along with "Negatives" in the 4th set of 2013. Now the 4th set of 2015 has been published but Sarvnayak series is just barely halfway. Including Yugandhar only 6 comics of Sarvnayak series have been published till now. Only 6 comics in 2 years for any comics series!!! I think that is very unfair for the reader and the series.
The interest of readers to the series will definitely be reduced. This is same as a TV serial which is shown only once a month. All the fun gets spoiled when you're impatiently waiting for the serial and the serial to be postponed to next month. You take yourself to guess how long the audience in to be associated.

Another example Mahanagayana Series- The 1st comics of the series Nagyana Upsanhaar was published in set 4 of 2014 and currently 4th set of 2015 has been released. And we all are still waiting for the release of next part Mahanagayan. Usually the interval between the publications of comics does not matter but the interval between the publications of the Comics Series is extremely important. 

According to me, the first comics of any series should publish only when more than half of the second part is ready. So it will not cause delay in the publication of the second part of the series. Similarly, before the publication of second-third-fourth comics do the same, prepare more than half of the next part.

I recommend 2-4 parallel comics series should be published and to be published regularly. Another series should be only started after the completion of one of the ongoing series. Doing so, Readers interest in the series is likely to continue and Raj Comics team will be able to give their 100% to the comics.
Plans must continue, but the start of new series should be considered carefully. Comics series should not drag for a long.

Most of the comics series that have been published are multistarrer (containing 2 or more heroes). As a result, solo-comics are less able to be published. Well we will speak later on this point.

I want to ask you a question- We are extremely happier with the release of consecutive comics series, but the reasons behind this happiness is that being fulfilled?


And now finally I would like to say, "Eat little but eat better".

So guys, what you all say? Do you agree with me?
Please give your valuable suggestions and opinions as comments. 




No hard feelings towards anyone. These are only my thoughts, nothing else.
A longstanding and a little fan of Raj Comics.

अधिक कॉमिक्स श्रृंखलाएं अच्छा या बुरा?  

इन दिनों कॉमिक्स की दुनिया में बहार सी छायी हुई है या फिर यूँ कहिये की बाढ़ सी आई हुई हैमैं बात कर रहा हूँ "कॉमिक्स श्रृंखलाओं" की। अग्रणी भारतीय कॉमिक्स प्रकाशक राज कॉमिक्स एक के बाद एक श्रृंखलाएं पेश कर रहे हैं।
राज कॉमिक्स पिछले दो वर्षों से कॉमिक्स श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित किये हुए हैकाफी कॉमिक्स श्रृंखलाएं अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं और धीरे-धीरे ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है 2013 में और उसके बाद- आतंकहर्ता नागराज(वीरगति), सिटी विदाउट अ हीरो, नरक नाशक, सर्वनायक, नागायण उपसंहार, बालचरित आदि प्रकाशित हुईं। इनमे से अधिकतर श्रृंखलाएं अभी भी चल रही हैं इसके बाद मौजूदा यानी के 2015 में राजनगर रक्षक, सर्वनायक-विस्तार, आखिरी रक्षक, डोगा निर्मूलक और क्षतिपूर्ति। और इन सब के साथ कुछ कतार में हैं जो की आने वाली हैं स्वामिभक्त रखवाले, शक्तिरूपा, नाग-ग्रन्थ, शुद्धिकरण, महानागायण इत्यादि. 

मेरे कहने का ये मतलब बिलकुल नहीं है की कॉमिक्स श्रृंखलाएं अधिक प्रकाशित न की जाएं
बल्कि मैं कहना चाहता हूँ की श्रृंखलाओं को एक निश्चित-ढंग से प्रकशित किया जाए ताकि श्रृंखलाओं की भरमार न हो और हर श्रृंखला समयनुसार पूर्ण हो ऐसा ना हो की एक के बाद एक नयी कॉमिक्स श्रृंखलाओं का प्रकाशन, चल रही श्रृंखलाओं के प्रकाशन और समापन में विलम्ब का कारण बनें। जैसा की अभी हो रहा है

उदाहरण के लिए सर्वनायक श्रृंखला को ही ले लीजिये- 2013 के चौथे सेट में नेगटिवस के साथ प्रकाशित हुई कॉमिक्स युगांधर से यह श्रंखला शुरू हुई थी और आज 2015 का चौथा सेट भी प्रकाशित हो चुका है परन्तु सर्वनायक श्रृंखला अभी मुश्किल से शायद आधी हुई हैयुगांधर को मिलाकर सर्वनायक श्रृंखला की कुल 6 कॉमिक्स प्रकाशित हुई हैं किसी भी कॉमिक्स श्रृंखला के लिए 2 साल में केवल 6 कॉमिक्स मेरे ख्याल से उस श्रृंखला और पाठक दोनों पर ज्यादती है ऐसे में श्रृंखला के प्रति पाठकों की रुचि निश्चित रूप से कम हो जाएगी। ये ठीक वैसा ही है जैसे की टेलेविज़न पर कोई धारावाहिक महीने में केवल 1 बार दिखाया जाता हो मजा तब बिलकुल किरकिरा हो जाता है जब आप बेसब्री से उसका इन्तजार कर रहे हों और धरावाहिक किन्ही कारणों से प्रदर्शित न हो पाये और अगले महीने के लिए स्थगित हो जाए। आप खुद अनुमान लगा लीजिये की ऐसे में आखिर कब तक दर्शक उससे जुड़े रहेंगे। 
 
दूसरा उदाहरण
महानागायण- इस श्रृंखला की पहली कॉमिक्स नागायण उपसंहार 2014 के चौथे सेट में प्रकाशित हुई थी और 2015 के चौथे सेट के प्रकाशित हो जाने तक भी उसके अगले भाग यानी महानागायण का कोई अता पता नहीं साधारणतः कॉमिक्स के प्रकाशन के बीच का अंतराल अधिक मायने नहीं रखता परन्तु कॉमिक्स श्रृंखलाओं के प्रकाशन के बीच का अंतराल अत्याधिक मायने रखता है
मेरे हिसाब से, किसी भी श्रृंखला की पहली कॉमिक्स को प्रकाशित करने से पहले यह ध्यान में रखना चाहये की श्रृंखला की दूसरी कॉमिक्स आधे से ज़यादा तैयार हो ताकि श्रृंखला के दूसरे भाग के प्रकाशन में विलम्ब न हो ठीक इसी तरह दूसरी-तीसरी-चोथी कॉमिक्स के प्रकाशन से पहले भी उसका अगला भाग आधे से ज़यादा तैयार हो

मेरा सुझाव है की 2 से 4 समानांतर कॉमिक्स श्रृंखलाएं प्रकाशित की जाएं और उन्हें नियमित रूप से प्रकाशित किया जाए
जब उन में से कोई भी एक श्रृंखला समाप्त हो तब नयी शुरू की जाए ऐसा करने से पाठकों की श्रृंखला में रूचि भी बनी रहेगी और राज कॉमिक्स टीम भी अपना 100% उन श्रृंखलाओं को दे पाएगी योजनाएँ ज़रूर साथ-साथ चलती रहें परन्तु प्रकाशन सोच-बिचार कर के ही शुरू किया जाएकिसी भी श्रृंखला को अधिक लम्बा न खिंचा जाए और न ही किसी को अधर में लटकाया जाए

अधिक कॉमिक्स श्रृंखलाएं प्रकाशित की जाएं लेकिन समय पर पूरी भी हों तो ये प्रकाशक और पाठक दोनों के लिए अच्छा होगा
ठीक इसके बिपरीत अधिक कॉमिक्स श्रृंखलाएं प्रकशित हों लेकिन समय पर पूरी न हों तो ये दोनों के लिए बुरा नहीं बहुत बुरा साबित होगा। पाठक की उस कॉमिक्स श्रृंखला में दिलचस्पी कम हो जाएगी और अगर पाठक नहीं रहेंगे तो प्रकाशक का नुक्सान तो तय है।

ज़्यादातर जो श्रृंखलाएं प्रकाशित हो रही हैं वो मल्टीस्टार
(2 या अधिक नायकों युक्त) हैं। जिसकी वजह से एकल कॉमिक्स बहुत कम प्रकाशित हो पा रही हैं खैर इस पर फिर कभी बात करेंगे।

में आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ - लगातार कॉमिक्स सीरीज के रिलीज़ होने से हम सब बेहद खुश हैं, लेकिन इस ख़ुशी के पीछे जो वजह है क्या वो पूरी हो रही है? 

और अब अंत में एक बात कहना चाहूंगा की, "थोड़ा खाओ मगर अच्छा खाओ"


तो दोस्तों आप सब का क्या कहना है? क्या आप मुझ से सहमत हैं?
अपने कीमती सुझाव और राय कमेंट्स के रूप में ज़रूर दें
 

किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं, यह केवल मेरे बिचार हैं।
राज कॉमिक्स का एक पुराना और छोटा सा प्रशंसक।  


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4 comments:

  1. did yuforget about sawrg hetu that is delayed by more than 3 year

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    Replies
    1. I have not forgotten bro,
      Actually 'Swarag Hetu' the fifth part of the 'Yoddha -Swarag Se Dharti Tak' series was in queue, but instead of releasing 'Swarag Hetu' Raj Comics started Sarvnayak series. And the story after 'Swarag-Patra' continued in 'Yugandhar' and 'Sarvyugam'. Currently Sarvnayak series is ongoing. The remaining story may be continued in this series or a separate comic could released after the Sarvnayak series.
      All depends on RC, let’s see what happen.

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  2. i AGREE WITH YOU BRO. Previously RC publish NAGAYAN series in proper manner.Because they fully concentrate on that but now onwards it could not happend.

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  3. Its because of the fall in demand that comics are getting published so infrequently now. If there was demand, most of the series would have been concluded by now and new series would have started as more sets would have published per year as against just 2.

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