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Review Moat Ka Baazigar Kshatipoorti 2 Nagraj

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 Review - Moat Ka Baazigar
 Kshatipoorti Series | Raj Comics 

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RC Official Rating: N/A 

Sr.No/Code: SPCL-2610-H
ISBN: 9789332427075
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Nitin Mishra
Penciler: Hemant Kumar
Inker: Vinod Kumar, Ishwar Art, Swati

Colorist: Sunil Dasturiya, Bhakta Ranjan Pages: 96
Price: Rs 90.00

Moat Ka Baazigar the second part of Kshatipoorti Series. Let's have a look at this comic and let's try to find out its weak and strong aspects.

Story Summary:

It is a superb comic, full of suspense and excitement. Some secrets are revealed and many are yet to get off the curtain. Firstly, an unknown man Masaya who had started his journey from Kolkata to Baghdad and now he has reached to the African forests. Then, Aatankharta Nagraj appeared in New York. And after then, the presence of Raj in Mumbai!!! Of course, there will be many questions in the minds of the readers. 

Who is this man Masaya and where he came from? On the other side, Atankharta Nagraj has suddenly appeared in New York. So far the reader's were thinking that Masaya is Nagraj in actually. Then who is this man in New York? He exactly looks like Nagraj and has the same powers like him? Besides these two, Raj has suddenly arrived in Mumbai to protect Princess Visarpi. But how is this possible? As well as, Paradox is still a mystery. And who is that woman who had ordered to kidnap princess Visarpi in Mumbai? 

In addition to the ongoing story of present time, the story of Nagraj's past has become mysterious too. Every fan of Nagraj gets excited about the story of his past. And this time, this excitement is over the moon. Who is this second Nagpasha, and the mysterious man Amukh? And that man and woman are the most mysterious, who are telling the story of Nagraj to someone. By looking at their interaction style, language, and portrayal, I guess they are Yugam and Avadhi. Have you noticed the dialogue of this anonymous man? He says, "My job is to build a bridge over the timeline, which may connect the both sides". See page no.5, dialogue frame no.2. Well, actually who are they? And to unravel all the mysteries of the rest, we have to wait for the next parts of the series.

Review - Maut Ka Baazigar

In terms of the story, the story is full of adventure, mystery, and suspense. It imitates the readers and growing up with good pace. A tiny glimpse linked to the life of Masaya has increased even more excitement and curiosity to the story. The encounter between Masaya and Thodanga was good enough. Nice to see the old characters like Satranga, Daniel and Sisi once again. They have been brought into the story beautifully, and that all in a new avatar. Emotions and Action are listed brilliantly to the Ichhadhaari Terrorist attack taking place in New York. Perhaps for the first time, the past of Nagraj and the history of Takshaknagar is being shown so detailed, which will surely love by the readers. And maybe it's just a beginning. The story overall is fantastic, 4.5 out of 5.

Let's talk about the artwork. Of course a little, but the artwork has disappointed me. I had expected better than this, especially Chapter 4 (Bhoola Hua Rakshak) and a few more frames. Furthermore, the entire artwork of the comic is good and commendable. Penciling and color combination is great. For Artwork 4 out of 5.

Let’s move towards the dialogues, While writing the dialogues, it has been taken care of that whose dialogues will be in pure Hindi, and where to use simple words. Dialogues are vibrant and powerful, 4 out of 5.

Drawbacks of the comics:

  • Two stars were shown on the forehead of Thodanga, see Page no.14. But just except this scene, the rest in every scene there is the moon and a star on his forehead. Here is the slightest lapse in the drawing.
  • In page number 17 the earrings of Masaya are missing, another mistake in drawing.
  • Actually, it is not a drawback of the comic, it is a fault of the series. The gap between the release of the first part 'Kshatipoorti' and the second part "Moat Ka Baazigar" was almost 10 months. Which is quite high for a comic series, must need to work on it.

Strengths of the comic:

  • The concept of Aatankharta and Vishwarakshak is excellent and it has been renovated in a very good way.
  • Ichadhaari Terrorism concept is wonderful. Now it will be interesting to see, that in what way the writer moves forward with this concept.
  • "The time stream of Nagraj has diverged, the whole world and everything have been split down. Because the world needs the both, Aatankharta and Vishwarakshak". I think, before this comic many readers surely fail to understand the concept of 3-3 Nagraj, the Aatankharta, Narak Naashak and Vishwarakshak. But perhaps it will be clear in the upcoming parts of the series. We can Expect.
  • The story was interesting so far, but now it is becoming even more exciting. Story 4.5 out of 5 points.

Overall "Moat Ka Baazigar" is a perfect comic and a worth reading. If you missed it, you will never fully understand your beloved Nagraj. One of the best comics released in 2016 so far. Be sure to read this comic. If you have not read it, then I would say you missed the best one. I know, you all are waiting eagerly for the upcoming and the third part of the series "Vishprast", and of course me too.

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Review Maut Ka Baazigar - Pic 2

क्षतिपूर्ति श्रंखला भाग दो, 'मौत का बाजीगर'। आइए एक नजर डालते हैं इस कॉमिक पर और चर्चा करते हैं इसके कमजोर और सशक्त पहलुओं पर। 

कहानी सारांश:

"मौत का बाजीगर", कॉमिक बेहद शानदार है रहस्य और रोमांच से भरपुर। कुछ राज खुल रहे हैं और कईयों पर से पर्दा उठना अभी बाकी है। पहले कोल्कता से बग़दाद होता हुआ अफ्रीका पहुंचा वो अनजान शख्स मसाया, फिर न्यूयॉर्क में नजर आया आतंकहर्ता नागराज, और अब मुंबई में राज की मूजूदगी!!! निश्चय ही, पाठकों के दिलो-दिमाग में कई सारे सवाल उठ खड़े हुए होंगे। 

कौन है ये मसाया और कहाँ से आया है? वहीँ दुसरी तरफ़ न्यूयॉर्क में अचानक से आ खड़ा हुआ है आतंकहर्ता नागराज। अभी तक तो पाठक मसाया को नागराज समझ रहे थे, तो फिर ये कौन है जो हुबहु नागराज की ही तरह दिख रहा है और उसी के जैसा शक्तिधारक भी है? इन दोनों के अलावा मुम्बई में विसर्पी की रक्षा करने अचानक आ पहुंचा है राज। लेकिन यह कैसे संभव है? साथ ही पैराडॉक्स नाम की गुथी अभी भी अनसुलझी ही है। मुम्बई में विसर्पी का अपहरण करवाने वाली औरत कौन है?

वर्तमान में चल रही कहानी के अलावा नागराज के अतीत की कहानी भी रहस्यमयी हो गयी है। नागराज का हर चाहने वाला नागराज के अतीत की कहानी को लेकर रोमांचित हो उठता है। और इस बार ये रोमांच सातवें आसमान पर है। कौन है यह दूसरा नागपाशा और रहस्यमय शख्स अमुख? और सबसे ज्यादा रहस्यमयी हैं वो शख्स और औरत जो किसी को नागराज की कहानी सुना रहे हैं। उस शख्स और औरत के चित्रण, बातचीत के अन्दाज़ एवं भाषा को देख मुझे लगता है की वह युगम और अवधि हैं। उस शख्स के संवाद पर ध्यान दें, "पर मेरा तो कार्य ही समयधारा पर पुल बनना है, जोकि दोनों किनारों को जोड़ दे"। देखें पृष्ठ संख्या 5, संवाद फ्रेम 2। खैर असल में वह कौन हैं और बाकी के सभी रहस्यों को जानने के लिए हमें इंतज़ार करना होगा श्रृंखला के आगामी भागों का।

समीक्षा - मौत का बाजीगर

बात करें कहानी की तो कहानी उत्सुकता, रोमांच और रहस्य से भरी पड़ी है। यह पाठकों को लुभाती हुई और दिलों में उतरती हुई, अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। मसाया की ज़िन्दगी से जुड़ी जो एक छोटी सी जलक दिखाई गयी है, उसने पाठकों में रोमांच और उत्सुकता को और भी बढ़ा दिया है। मसाया और थोडांगा के बीच मुठभेड़ काफी अच्छी रही। साथ ही, सतरंगा, डेनियल और सीसी जैसे पुराने किरदारों को एक बार फिर से देख कर अच्छा लगा। बड़ी ही खूबसूरती के साथ इन्हें कहानी में लाया गया है, और वह भी बिलकुल नए अवतार में। न्यूयॉर्क में हो रहे इच्छाधारी हमले में इमोशन और एक्शन का अच्छा तड़का लगाया गया है। वहीँ नागराज के अतीत और तक्षकनगर के इतिहास को शायद पहली बार इतना विस्तार पुर्वक दिखाया जा रहा है, जोकि पाठकों को बेहद पसंद आएगा। और शायद यह तो अभी शुरुआत है। कहानी कुलमिलाकर शानदार है, 5 में से 4.5 अंक।

आते हैं आर्टवर्क की और, आर्टवर्क ने मुझे थोड़ा ही सही पर निराश ज़रूर किया है। मुझे इससे बेहतर की उम्मीद थी, खासकर अध्याय 4 भूला हुआ रक्षक और बीच में कुछ एक फ्रेम्स। इसके अलावा पूरी कॉमिक्स का आर्टवर्क शानदार है सराहनीय हैं। पेन्सिलिंग और रंग-सज्जा बढ़िया है। आर्टवर्क को 5 में से 4 अंक।

रुख करते हैं संवादों की और, संवाद लिखते वक़्त यह पूरा ध्यान रखा गया है कि किसके संवादों में शुद्ध हिंदी और कहाँ पर साधारण शब्द उपयोग करने हैं। संवाद जीवंत और जोशेली हैं, 5 में से 4 अंक । 

कॉमिक की कमियां:

  • पृष्ठ 14 थोडांगा के माथे पर दो सितारे बने हुए दिखाए गए हैं। जबकि इस दृश्य के अलावा बाकि हर दृश्य में उसके माथे पर एक सितारा और एक चाँद है। यहाँ चित्रकारी में थोड़ी चूक हुई है।
  • पृष्ठ संख्या 17 मसाया के कानों के कुंडल गायब हैं, चित्रकारी में एक और गलती।
  • इसे कॉमिक्स की खामी नहीं कहा जा सकता, यह श्रंखला की खामी होगी। श्रंखला के पहले भाग 'क्षतिपूर्ति' और दुसरे भाग 'मौत का बाजीगर' के जारी होने के बीच लगभग 10 महीनों का अंतराल रहा। जोकि एक कॉमिक श्रंखला के लिए काफी ज़्यादा है, इस पर कार्य करने की आवश्यकता है।

कॉमिक के मजबूत पक्ष:

  • आतंकहर्ता और विश्वरक्षक की संकल्पना बहुत ही शानदार है और इसे बड़े ही अच्छे तरीके से संवारा गया है।
  • इच्छाधारी आतंकबाद की परिकल्पना बहुत बढ़िया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लेखक इसे किस तरह से आगे बढ़ाते हैं।
  • "नागराज की समयधाराएँ अलग हो गयी हैं, पूरा संसार सब कुछ दो फाड़ हो गया है। क्योंकि संसार को दोनों की ही आवश्यकता है, विश्वरक्षक की भी और आतंकहर्ता की भी।" मेरी ही तरह कई पाठकों को तीन-तीन यानि विश्वरक्षक, आतंकहर्ता और नरक नाशक नागराज का कांसेप्ट समझ में नहीं आ रहा होगा। लेकिन अब शायद इस श्रृंखला के आगामी भागों में ये बात साफ हो जाएगी।
  • कहानी दिलचस्प तो थी ही, अब और भी ज्यादा रोमांचक होती जा रही है। कहानी को 5 में से 4.5 अंक।

कुल मिलाकर "मौत का बाजीगर" एक पढ़ने लायक बेहतरीन कॉमिक है। अगर आपने नहीं पढ़ी, तो आप नागराज को पूरी तरह से जान नहीं पाओगे। 2016 की सबसे बेहतरीन कॉमिक्स में से एक। यह कॉमिक ज़रूर पढ़ें, अगर आपने इसे नहीं पढ़ा, तो मैं कहूँगा की आप एक बेहतरीन कॉमिक्स का आनंद उठाने से चूक गए। बेसब्री से इंतजार रहेगा क्षतिपूर्ति श्रृंखला के आगामी और तीसरे भाग "विषप्रस्त" का। 

Review Maut Ka Baazigar - Pic 3
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