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Review Sarvmanthan - Sarvnayak Series Raj Comics

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 Review - Sarvmanthan | Sarvnayak Series 


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Review Sarvmanthan - Pic 1My Ratings: 4/5
RC Official Rating: N/A





Format: Printed
Issue No: SPHB-2584-H
Language: Hindi
Author: Nitin Mishra
Penciler: Sushant Panda
Inker: Vinod Kumar, IshwarArt, Swati
Colorist: Bhakt Ranjan, Basant
Pages: 96
Price: Rs. 110.00





Sarvnayak Series is full of superheroes and supervillains from every era and every time period. A series with so many characters is not an easy task. The writer Mr. Nitin Mishra deserve appreciation for doing full justice with each character and the story.
"Sarvmanthan" is the 5th part of the ongoing "Sarnnayak series". The comic was hooked from beginning to end, is extremely entertaining and exciting comic. The story has been put forward in a good way. Artwork and color combinations are better than the previous parts. 

The story begins from Behad forest(Assam) where Prlyanka and Dhananjay looking for the "Daughter of Nature".  The entry of Prakrti and Prakrat in the story felt good. 
On the other side maseeha have got unlimited powers from the god of evil and now he is become giant masseha. 
In "Stambhitkaal" Maharavan and his army were stopped from entering  Kaliyug by Kirgi, Jingalu and Durdamya army led by Mahatma Kaaldoot. 
Next scene "Before Judgment day" (Pralay) Nagpasha and Gurudev are trying to open the Time gate with the help of the enemies of nagraj and dhruv. 

And now let's move to the main storyline where competition taking place between Deshbhakt Dectective Tiranga and Shukr Shishya Shukral in the Mitheakaar's world. Both are facing their own past unwanted memories. During the competition some interesting and untold aspects related to the past of Tiranga and Shukraal had also appeared. Which give answers to many questions related to their past. Such as how the honor of being the only man-student of Shukracharya? From where he get Shakaly-shalaka? From where Tiranga learned the stunning fighting style etc. 
Tiranga was running ahead by 2/1, did not understand his sudden quit from the competition. Probably we will get the answer in the coming parts. 

While on the other side the snake powers of Nagraj have been transferred in Bhokal and Nagraj have got the Bhokal shield and sword.
Now both are trapped in Mitheakar's world and fighting with their own team heroes.
Another scene in the Eri's cave, Vordelo and his army has been join the battle along with Dracula and Sagam. Baby is also become a vampire and now helping Dracula and party. The battle has been quite exciting and accelerated. Jacob (pret uncle), Anthony and their mates are in even more difficulties now. 

In the finishing frame: to face the increased powers of Maharavan (that which he is still unaware) superheroes and supervillains are going to start Smudramanthan. Giant Adig is stands in place of Mandar Mountain and Mahatma Kaaldoot in place of Sheshnag.

Furthermore some exciting scenes and events are also in the comic, you should read the comic to enjoy them.


Weak Aspects of The Comic Sarvmanthan:


  • Firstly Era, Time-Period, Other-Planets and now Time-Dimensions. The story is becoming even more complicated. In such if the upcoming parts were delayed much, the readers will surely have to read the whole series from the beginning.
  • The answers to the previous questions are given in the story. More than that, new questions have arisen. Of course, It will increase the interest of the readers in the series which is beneficial. But if the comics release is delaying much, it may be harmful.


Strong Aspects of The Comic Sarvmanthan:


  • The artwork, story and the pace is excellent and it is very much better then the last part Sarvsangram which certainly will liked by the readers.
  • All the characters in the story not only being gathered but also new characters being created, such as the god of evil. Which is really good for comics industry and the comic lovers.
  • Continuing the story associated with major characters, some unspoken aspects being introduced. About which readers was clueless yet.

Overall an excellent comic, work of Nitin Mishra sir is highly appreciable. Wonderful combination of team effort by Raj Comics. Now waiting with curiosity for the upcoming issue "Sarvsandhi". 

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Review Sarvmanthan - Pic 2

समीक्षा सर्वमंथन - सर्वनायक श्रृंखला


र्वनायक श्रृंखला जो की हर युग और काल के महानायकों एवम महाखलनायकों से भरी पड़ी है। इतने अधिक किरदारों के साथ एक श्रृंखला आसान कार्य नहीं है। तारीफ करनी होगी नितिन मिश्रा जी की जिन्होंने हर किरदार और कहानी के साथ बखूबी न्याय किया है।
"सर्वमंथन" सर्वनायक श्रृंखला का छठा भाग है। कॉमिक ने शुरू से लेकर अंत तक बांधे रखा, बहुत ही मनोरंजक और रोमांचक कॉमिक है। कहानी को अच्छे अंदाज में आगे बढ़ाया गया है। चित्रण और रंग संयोजन पिछले भागों की तुलना में बेहतर हैं।

कहानी शुरू होती है बीहड़ वन (असम) से जहाँ प्रलयंका और धनंजय खोज रहे हैं "प्रकृति की बेटी"।  प्रकृति और प्राकृत का आगमन बढ़िया लगा। 
वहीँ दूसरी और मसीहा को मिल चुकी हैं असीमित शक्तियां और अब वो बन गया है दैत्यकार मसीहा। 
"स्तंभीतकाल" में महात्मा कालदूत के नेतृत्व में दुर्दम्य सेना, किरिगी, सामरी और जिंगलु मिलकर महारावण और उसकी सेना को कलियुग में प्रवेश करने से रोके हुए हैं।
वहीँ "प्रलय से पूर्व" नागराज और ध्रुव को उनके पुराने दुश्मनों से लड़वाकर गुरुदेव और नागपाशा समय के त्रिद्वार को खोलने में लगे हैं।  

और अब चलते हैं मुख्य कहानी की तरफ जहाँ देशभक्त डिटेक्टिव तिरंगा और शुक्र शिष्य शुक्राल के बीच हो रही प्रतिस्पर्दा मिथ्याकार के संसार में। दोनों ही नायक अपने ही भूतकाल की अनचाही यादों का सामना कर रहे हैं। इस स्पर्धा के दोरान तिरंगा और शुक्राल के अतीत से जुड़े कुछ रोचक और अनकहे पहलु भी सामने आये। जिनमें उनके अतीत से जुड़े कई सवालों के जबाब मिले। जैसे की शुक्राल को एकमात्र मानव शुक्र शिष्य होने का गौरव और शाकल्य-शलाका कैसे प्राप्त हुआ, तिरंगा की बढ़िया क्राइम फाइटिंग का राज़ आदि। 
परन्तु 2/1 से आगे चल रहे तिरंगा का एक दम से प्रतियोगिता छोड़ना समझ नहीं आया। शायद इसका जबाब आने वाले भागों में मिलेगा। 

वहीँ दूसरी और नागराज की नाग शक्तियां स्थानांतरित हो गई हैं महाबली भोकाल में और नागराज को मिल गई हैं भोकाल की ढाल और तलवार। अब दोनों ही योद्धा युगम द्वारा पैदा किए मिथ्याकार के तिलिस्म में फंस कर कर रहे हैं अपने-अपने दल नायकों का ही संहार।
एक अन्य दृश्य, इरी की गुफा में वॉर्डेलो और उसकी सेना भी ड्रेकुला और सगम के साथ लड़ाई में शामिल हो गयी है। ड्रेकुला ने बेबी को भी वैम्पायर बना दिया है। लड़ाई काफी रोमांचक और तेज हो गयी है। जैकब (प्रेत अंकल), एंथोनी एवम साथियों की मुश्किलें अब और भी ज्यादा बड़ गयी हैं। 

अंतिम अध्याय में: महारावण की बड़ी हुई शक्तियों (जिनसे वो अभी खुद भी अनजान है) का सामना करने के लिए महानायक और महाखलनायक करने जा रहे हैं समुद्रमंथन। मंदार पर्वत की जगह लेगा भीमकाय अडिग और शेषनाग की जगह महात्मा कालदूत।     

इसके अलावा कुछ अन्य दृश्य /घटनाएं भी हैं कॉमिक में जिन्हे जिनका आनंद उठाने के लिए आपको ये कॉमिक ज़रूर पढ़नी चाहिए। 


कॉमिक के कमजोर पक्ष: 


  • पहले युग, समय-काल, अन्य-ग्रह और अब आयाम। कहानी और भी ज्यादा पेचीदा होती जा रही है। ऐसे में अगर अगले भागों के प्रकशन में अधिक देरी हुई तो निश्चित है की पाठकों को पूरी श्रृंखला शुरू से पढ़नी पड़ेगी।
  • पिछले सवालों के जितने जवाब इस कहानी में दिए गए हैं उस से ज्यादा तो नए सवाल पैदा हो गए हैं। वैसे तो इससे श्रृंखला में पाठकों की रूचि बढ़ेगी जो की फायदेमंद है, किन्तु अगर कॉमिक्स रिलीज़ के बीच की समवधि ज्यादा हो गयी तो यह नुकसानदेय हो सकती है  


कॉमिक के सशक्त पक्ष:


  • कहानी पिछ्ले भाग (सर्वसंहार) के मुकाबले ज़यादा बढ़िया है और रफ़्तार भी अच्छी है, जो की निश्चित रूप से पाठकों को पसंद आएगी
  • कहानी में न सिर्फ सभी किरदारों को इकठ्ठा किया जा रहा है बल्कि नए किरदारों को भी गढ़ा जा रहा है, जैसे की अधर्म के देवता। 
  • कहानी को जारी रखते हुए प्रमुख किरदारों से जुड़े कुछ अनकहे पहलुओं को भी सामने लाया जा रहा है जिनसे पाठक अबतक अनजान थे और अब जानकार हैरान हैं

कुलमिलाकर एक बेहतरीन कॉमिक नितिन मिश्रा जी की जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी। राज कॉमिक्स टीम का मिलाजुला और बढ़िया प्रयास। उत्सुकता के साथ इन्तजार रहेगा आगामी अंक "सर्वसन्धि" का।    
Review Sarvmanthan - Pic 3






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