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Review Doga Bekabu Doga Unmoolan Series Raj Comics

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  Review -Doga Bekabu | Doga Unmoolan Series 


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Review Doga Bekabu Pic 1
My Ratings: 4/5
RC Official Rating: N/A




Format: Printed
Issue No: SPCL-2593-H
Language: Hindi
Author: Mandar Gangele, Sudeep Menon
Penciler: Dildeep
Inker: Vinod Kumar, IshwarArt
Colorist: Shadab
Pages: 32 (25 Without ads)

Price: Rs 40.00
 

Story Doga Bekabu Raj Comics:



Even the name of the comic is Doga Bekabu, but in the beginning of the story Lomadi was uncontrolled (Bekabu).

Scene 1: Somewhere in Mumbai - Lomadi (Monica) is upset by the incident that occurred on the surprise birthday party of Suraj. (Read the previous part-Doga Nirmulk). Birthday party organized by Monica refreshed the old wounds of Suraj again. Lomadi feels that the birthday party had got spoiled due to Doga. Suraj is not responsible actually. When Doga dominate on Suraj's personality, then he replaces the personality of Suraj. Meanwhile, Lomadi take all her frustration out on a badass by beating him. Doga reached there and stopped her.

Scene 2:
Safedjung Building, Mumbai - The head of a criminal organization Yusuf Khan is celebrating his birthday party, which is organized by his son Sameer. Yusuf Khan announced to open a new research and development company. The company's chief executive officer will be his son Sameer. Suddenly Doga arrives there and started open firing. He killed more than 200 people present there. Sameer tried to save his father, but Doga shoots both of them.

Scene 3:
That shootout is being discussed everywhere in the Media. More than 200 people were killed in the massacre and Yusuf Khan is the only survivor. He is in serious condition in the hospital. After regaining consciousness Yusuf Khan orders to calls Nirmulak.

Scene 4: Monica's Home - Suraj to apologize to his birthday event reaches Monica's home. But Monica does not want to speak to him. She believes that all this happened because of Doga. She says that Doga is out of control now and the recent shootout by Doga is the proof of that. Suraj said if you have a problem with me do so, but don't try to interfere in Doga and his works.

Scene 5: Somewhere in Mumbai - Nirmulk arrives on summon by Yusuf Khan. Yusuf Khan asks Nirmulk, his offer to kill Doga is still available. Yusuf Khan himself had rejected whom earlier. Nirmulk says I was already prepared, you delayed your decision.

Scene 6: While jogging, a woman stops to rest under a tree for a while. After a while a few drops of blood falls on her. When she looks up, a dead body hangs from the tree with a note............ Ye hai ……Doga Nayay


Review Doga Bekabu:


If a twenty-five-pages comic is in your hands, then along with Doga you could also get out of control. What will the author give to his readers in just twenty five pages?!!! 
There's nothing much to say and review. The story is gradually growing. Good, but just is in pieces. Artwork is fine and appreciable. Drawing and coloring is great. Dialogues are strong, completely suit for Doga comics. There is something missing in the comic that is the page numbers. The first 7 pages goes to Lomadi, in the next 7 pages Doga gets out of control and turns Yusuf Khan's birthday into his funeral. Monica and Suraj got 4 pages, Nirmulak succeeded in taking 3 pages. News channel, hospital and the female jogger shared the left 4 pages. Then the comic ends. I mean, will be continued in the next part Doga Nayay.


Positive Sides of the Comic:

  • Artwork is good enough, the artist deserves compliments.
  • The story is very consistent with dialogue. The words were taken care of while choosing.

Negative Sides of the Comic:

  • Doga is appeared only in 6 pages in 18 frames.
  • Number of pages of the comic is very less.


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Review Doga Bekabu Pic 2


समीक्षा डोगा बेकाबू


कॉमिक्स का नाम भले ही डोगा बेकाबू है लेकिन कहानी के शुरू में ही लोमड़ी बेकाबू नजर आई।



कहानी डोगा बेकाबू



दृश्य 1: मुंबई में कहीं पर - लोमड़ी (मोनिका) सूरज की सरप्राइज बर्थडे पार्टी पर हुई घटना से खफा है (जानने के लिए पढ़ें पिछले भाग-डोगा निर्मूलक)। मोनिका द्वारा आयोजित इस बर्थडे पार्टी ने सूरज के पुराने ज़ख्मों को फिर से हरा कर दिया। लोमड़ी को लगता है की बर्थडे पार्टी के खराब होने की वजह डोगा है सूरज नहीं। डोगा जब भी सूरज पर हावी हो जाता है तो सूरज का व्यक्तित्व धुँधला पड़ जाता है। इसी बीच लोमड़ी एक बदमाश की अच्छी-खासी धुनाई कर अपनी सारी भड़ास उसपर निकाल देती है। डोगा वहां पहुँचता है और उसे रोकता है। लोमड़ी वहां से भाग जाती है।

दृश्य 2: यूसुफ खान के जन्मदिन का जश्न, सफदजंग बिल्डिंग, मुंबई - एक अपराधिक संगठन के मुखिया युसूफ खान की जन्मदिन पार्टी चल रही है, जो की उसके बेटे समीर द्वारा आयोजित की गयी है। युसूफ खान एक नयी रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी खोलने की घोषणा करता है, जिसका मुख़्य  कार्यकारी अधिकारी उसका बीटा समीर होगा। तभी वहां डोगा आ पहुंचता है और अँधा-धुंध गोलियां बरसाना शुरू कर देता है। वहां मौजूद 200 से अधिक लोग मारे जाते हैं। समीर अपने पिता को बचाने की कोशिश करता है लकिन डोगा उन दोनों को भी गोलिओं से भून देता है।

दृश्य 3:  ख़बरों में हर तरफ डोगा के इस कारनामे की चर्चा हो रही है। इस कत्ले-आम में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और केवल युसूफ खान ही जीवित बचा है। वो हस्पताल में गंभीर हालत में है। युसूफ खान होश में आने पर निर्मूलक को बुलाने को कहता है।

दृश्य 4:
मोनिका के घर पर - सूरज उसके जन्मदिन वाली घटना की माफ़ी मांगने के लिए मोनिका के घर पहुँचता है
लेकिन मोनिका उससे कोई बात नहीं करना चाहती। सूरज के काफी समझने पर भी मोनिका नहीं मानती। वो डोगा को इन सब परिस्तिथिओं की वजह मानती है। वो कहती है की डोगा बेकाबू हो चुका है और इसका सबूत है हाल ही में डोगा द्वारा किया गया क़त्ल-ऐ-आम। सूरज हार कर वापस जाते हुए कहता है की तुम्हे अगर मुझसे शिकायत है तो करो लेकिन डोगा और उसके कामों में दखल देने की कोशिश मत करो।

दृश्य 5: मुंबई में कहीं पर - युसूफ खान के बुलाने पर निर्मूलक हाजिर हो जाता है। युसूफ खान निर्मूलक से पूछता है की क्या उसका डोगा को मारने का प्रस्ताव अभी भी उपलब्ध है। जिसे की पहले युसूफ खान खुद ठुकरा चुका था। निर्मूलक कहता है की मैं तो कब से तैयार था फैसला लेने में अपने देरी की।

दृश्य 6: जॉगिंग करती हुई एक महिला जब एक पेड़ के नीछे कुछ देर विश्राम के लिए रूकती है तो उस पर खून की कुछ बूंदे टपकती हैं। जब वो ऊपर देखती है तो एक लाश पेड़ से उलटी लटकी है जिस पर  है जिस पर लिखा है- यह है....डोगा न्याय  
 


समीक्षा डोगा बेकाबू:


पचीस पृष्ठों की कॉमिक हो तो डोगा क्या कोई भी बेकाबू हो सकता है। लेखक पचीस पृष्ठों में भला क्या दे पाएगा आपने पाठकों को???!!! 

कहने और समीक्षा करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। अच्छी है बस टुकड़ों में है। आर्टवर्क उम्दा है सराहनीय है, चत्रकारी और रंग सज्जा काफी बढ़िया है। संवाद दमदार हैं बिलकुल डोगा की कॉमिक्स के अनुरूप। अगर इस कॉमिक्स में कुछ कमी है तो वो है इसकी पृष्ठ संख्या। पहले 7 पृष्ठ लोमड़ी के नाम रहे, अगले 7 पृष्ठों में डोगा बेकाबू हो गया और उसने युसूफ खान की जन्मदिन पार्टी का क्रियाकर्म कर दिया। 4 पृष्ठ मोनिका और सूरज के नाम रहे, 3 पृष्ठ निर्मूलक ने ले लिए। बचे 4 पृष्ठ वह न्यूज़ चैनल, हस्पताल और जॉगर महिला के हिस्से में आये। और फिर कॉमिक समाप्त मेरा मतलब कॉमिक को जारी रखा जाएगा अगले भाग डोगा न्याय में। 


कॉमिक के प्लस पॉइंट्स:

  • आर्टवर्क काफी बढ़िया है, आर्टिस्ट तारीफ के हकदार हैं।
  • संवाद बिकुल कहानी के अनुरूप है। शब्दों को चुनते वक़्त पूरा ख्याल रखा गया।


कॉमिक के माइनस पॉइंट्स:

  • डोगा केवल 6 पृष्ठों की 18 फ्रेम्स में नजर आया.
  • कॉमिक की पृष्ठ संख्या बहुत ही कम है। 
Review Doga Bekabu Pic 3




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