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Review No Men's Land Raj Comics

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 Review - No Men’s Land | Balcharit 3 

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Review - No Mans Land Pic 1

My Ratings: 4/5 

Average Ratings: 4.5/5 

RC Official Rating: N/A

ISBN: 9789332425446
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Anupam Sinha

Penciler: Anupam Sinha
Inker: Vinod Kumar, Swati Choudhary
Colorist: Basant Panda, Abhishek Singh, Sunil Dasturiya
Genre: Raj Comics

Pages: 96
Price: Rs 90.00

Summary No Men's Land:

After the Navy guards and the Commando Force, Dhruv has also failed to stop Vakra. Vakra has almost killed Dhruv, but a man named Mover defends Dhruv and takes him to the hospital.
On the other hand, the two masked mans the kidnappers of Jacob were actually Natasha and her associate Victor. Robo has died and Dhruv is declared clinically dead. After the Doctors, Shweta and Black Cat are the only who knows about the death of Dhruv.
Vakra did not found the formula in the container that he was looking for. Then he had imprisoned Commando Force cadets.
In between the life and death Dhruv has been reached to the No Men's Land. Where, he sees the memories glimpses of his parents and the circus. Dhruva in his memories sees a man called Pad-Piper tried to kill his mother Radha and how Radha fought and killed him.
A woman, who is likely to be Dhruva's mother, placed the life saving medicine (sanjeevani) in the hospital for Dhruv. But before she gets out of the hospital, Black Cat and Shweta stopped her.
Dhruv sees another suicide attack of trained rabbits on the circus in his memories. And now Radha is just a few moments far from her death.

The further story will be continues in the upcoming part "Phoenix".

Review - No Men's Land

Review Language: Hindi  and English
Reviewer Ratings: 4/5
Review Date: 12/26/15, 11:15 PM
Reviewed By: ajaykc86

No Men's Land - A fabulous comic of a memorable Comics series by an excellent writer. As the series is growing up the eagerness, interest and excitement is rising up too. One more jewel the "No Man's Land" have been added to this memorable series. Anupam sir deserves the compliments.

Comes to the story, the story imitates the readers and growing up with good pace. This comic has answered many questions of the previous parts and has raised few new questions too. Action, suspense and emotion have been used in the right amount in the story. The result another great comic has emerged. For a story the most important is to keep the reader engaged until the end and "No Man's Land" has stood the test perfectly.

Comic’s artwork is commendable, except for a few scenes. From the title cover until the last page, artwork is wonderful. Inking and the coloring both are great. Drawing is extremely good and the characters facial expressions can be read easily.

Dialogues of the comic are emphatic and emotional. As per the demand of story the dialogue are accurate and balanced. Such dialogues generate interest while reading the comic. Little humor and derisive dialogue have also instilled into the story, that are really fantastic. When a comic has such heavy dialogues full of humor, the readers would not feel bored in a serious ongoing story.


Drawbacks of the Comic: -

  • During the entire battle between Dhruv and Vakra, torn costume of Dhruv is not shown anywhere. Even when Mover saves Dhruva, Dhruva's costume is still shown in good condition. But when Dhruv was being brought out of the car by the Doctor, then the costume of Dhruv is shown badly torn. It is shown torn from several sides. Here is a slightest mistake in the drawing.
  • Robo was a Christian, he should be buried, but Anupam sir burned him. Robo's soul may rest in peace.
  • Almost 1 year has been passed since this comic series began and only 3 parts have been released so far. Average calculations, each part took 4 months to release. I mean, the upcoming parts of the comics are coming too late.
  • Drawing is a little bad in some frames of a few pages (as compared to the usual work of Anupam Sir). Like some frames of the page numbers 24, 38, 78.
  • Page 49 the last frame, the doctor says, "Call the family, now they will respond to the press standing outside". But while Dhruv was being brought inside the hospital, the same doctor says to the receptionist "No press strictly".  Means, the press reporters were not in the hospital already. The checkup of Dhruv did not last even longer, his pulse was soon down and he was declared clinically dead. Press reporters cannot reach the hospital so quickly and there was not a single press reporter already in the hospital. Here is a mistake in writing the Doctor's dialog.

Strong side of the Comic: -

  • Readers were waiting eagerly for this comic No Man's Land and the waiting was mainly due to the encounter between Dhruv and Vakra. Their wait was not wasted, the encounter between Dhruv and Vakra is shown detailed enough. Around 18 pages are dedicated to the encounter of Dhruv and Vakra.
  • How could our Super Commando Dhruv lose ground!!! ??? Why Dhruv faltered against Vakra? A legitimate and logical reason has been given by the author. This would be easy to swallow for the fans of Dhruv (like me).
  • The dialogues of the comic are quite powerful and refueled. Like; "mujhse ladkar, mujhe na apna samay do, na hi apne jaan", "na dil ki dhadkan rukane se, na pulse ke khatm hone se, insaan marata hai aas ke khatm hone se", "khoon ki kami thi bas, ab tumhara peekar poori kar lungi". I really could not translate them into English, along with their weight. Their strong influence will end up.

And now finally I would like to say, you will definitely enjoy this comic "No Man's Land".
If you have not read yet, then must read it.

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Review - No Mans Land Pic 2

कहानी सार - नो मेंस लैंड:

नेवी के जवान और कमाडो फ़ोर्स के बाद ध्रुव भी वक्र को रोकने में नाकामयाब होता है। वक्र ने ध्रुव को लगभग मोैत के मुंह में पहुंचा दिया है। लेकिन मूवर नाम का एक शख्स ध्रुव को बचाकर अस्पताल ले जाता है।
वहीँ दूसरी और जैकब का अपहरण करने वाले दोनों नकाबपोश असल में नताशा और उसका सहयोगी विक्टर हैं। रोबो का देहांत हो गया है और ध्रुव क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया है। ध्रुव की मोैत की खबर डॉक्टर्स के आलावा केवल श्वेता और ब्लैक कैट को ही है।
वक्र को कंटेनर में उसके मतलब की चीज नहीं मिली जिसकी उसे तलाश है। उसने कमांडो फ़ोर्स के कैडिट्स को बंदी बना लिया है।
ध्रुव ज़िन्दगी और मोैत के बीच की नो मेंस लैंड में पहुँच गया है। जहाँ उसके अपने माता पिता और सर्कस के यादें हैं। ध्रुव यादों में अपनी माँ राधा पर हुए हमलों के झलकें देखता है।
ध्रुव की माँ होने की संभावनाओं वाली औरत हस्पताल में ध्रुव के लिए संजीवनी औषधि छोड़ जाती है। लेकिन अस्पताल से बाहर निकलने से पहले ही श्वेता और ब्लैक कैट उसका रास्ता रोक लेती हैं।
ध्रुव अपनी यादों में देखता है की उसकी माँ राधा और मोैत के बीच में केवल कुछ ही पलों का फासला है।

कहानी जारी रहेगी आगामी भाग "फिनिक्स" में।

समीक्षा - नो मेंस लैंड:

नो मेंस लैंड - एक बेहतरीन लेखक द्वारा एक यादगार कॉमिक्स श्रृंखला की एक बेजोड़ कॉमिक। जैसे-जैसे यह श्रृंखला आगे बढ़ती जा रही है दिलचस्पी, उत्सुकता और रोमांच भी बढ़ता जा रहा है। इस बेहद शानदार श्रृंखला में एक नगीना और जुड़ गया है "नो मेंस लैंड"। अनुपम जी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम होगी।

बात करें कहानी की तो, कहानी पाठकों को लुभाती हुई और दिलों में उतरती हुई अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। पिछले भागों के कई सवालों के जवाब मिले और कई नए सवाल इस भाग में खड़े हो गए। कहानी में एक्शन, सस्पेंस और इमोशन का ज़ोरदार तड़का लगाया गया है, नतीजा एक शानदार  कॉमिक बन कर सामने आई है। एक कहानी के लिए सबसे एहम होता है पाठक को अंत तक बांधे रखना और "नो मेंस लैंड" इस कसौटी पर बिलकुल खरी उतरी है।

कॉमिक का आर्टवर्क सराहनीय है। मुखपृष्ठ से लेकर अंत तक सभी पृष्ठ अच्छे बने हैं, कुछ एक दृश्यों को छोड़ कर। रंग सजा और इंकिंग बढ़िया है। चित्रांकन बेहद उम्दा है, किरदारों के चेहरे के भावों को आसानी से पढ़ा जा सकता है।

कॉमिक्स में संवाद ज़ोरदार भी हैं और भावुक भी। कहानी की मांग के अनुसार संवाद बिलकुल सटीक और सुलझे हुए हैं। ऐसे संवाद कॉमिक पढ़ने में दिलचस्पी पैदा करते हैं। बीच बीच में जो छुटपुट हास्य और चटपटे संवाद डाले गए हैं वह बढ़िया हैं। इससे एक सीरियस चल रही कहानी में पाठक को बोरियत महसूस नहीं होती।

कॉमिक की खामियां:

  • वक्र और ध्रुव पूरी की लड़ाई के दौरान कहीं भी ध्रुव की कॉस्टयूम फटी हुई नहीं दिखाई गयी है। जब वो अनजान शख्स मूवर ध्रुव को वक्र से बचाकर लाता है तब भी ध्रुव की कॉस्टयूम सही सलामत दिखाई गयी है। लेकिन जब डॉक्टर ध्रुव को कार से बाहर निकालते हैं, तो ध्रुव की कस्टम की बुरी हालत होती है। वह कई जगह से फटी हुई दिखाई गयी है। यहाँ चित्रकारी में ज़रा सी चुक हुई है।
  • रोबो एक क्रिस्टन था उसको दफनाया जाना चाहिए था, लेकिन अनुपम जी ने उसे जला डाला। रोबो की आत्मा को शांति मिले।
  • इस कॉमिक श्रृंखला के अब तक 3 भाग रिलीज़ किये गए हैं और इस श्रृंखला को शुरू हुए पूरा 1 वर्ष हो गया है। औसतन 4 महीनों में एक भाग जारी हुआ है। मेरे कहने का मतलब, कॉमिक के आगामी भाग बहुत देरी से आ रहे हैं।
  • कुछ पृष्ठों की कुछ फ्रेम्स में चित्रांकन थोड़ा ख़राब हुआ है (अनुपम जी के काम के हिसाब से देखें तो)। उदाहरण के लिए पृष्ठ संख्या 24,38,78 के कुछ फ्रेम।
  • पृष्ठ संख्या 49 आखिरी फ्रेम, डॉक्टर कहता है की,"परिवार वालों को बुला लो, अब बाहर खड़े प्रेस वालों को वही जवाब देंगे"। लेकिन जब ध्रुव को हस्पताल के अंदर लाया जा रहा था यही डॉक्टर रिसेप्शनिस्ट को कहता है की "नो प्रेस स्ट्रिक्टली"। मतलब प्रेस रिपोर्टर्स पहले से अस्पताल में नहीं थे। ध्रुव की जांच भी जयादा वक़्त नहीं चली, जल्दी ही उसकी पल्स डाउन हो गयी और वह क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया। पत्रकार इतनी जल्दी अस्पताल नहीं पहुँच सकते और न ही कोई प्रेस रिपोर्टर पहले से ही अस्पताल में मौजूद था। यहाँ डॉक्टर के संवाद में चुक हुई है।

कॉमिक के मजबूत पक्ष:

  • पाठकों को नो मेंस लैंड कॉमिक का बेसब्री से इंतज़ार था और इस इंतज़ार का मुख्या कारण था ध्रुव और वक्र के बीच होने वाली मुठभेड़। उनका इंतज़ार व्यर्थ नहीं गया, ध्रुव और वक्र की मुठभेड़ को काफी विस्तारपूर्वक दिखाया गया है। तक़रीबन 18 के आस पास पृष्ठ ध्रुव और वक्र की मुठभेड़ को समर्पित रहे।
  • अच्छे अच्छों को धुल चटाने वाला, हमारा सुपर कमांडो ध्रुव भला हार कैसे सकता है!!!??? वक्र के विरुद्ध ध्रुव के कमजोर पड़ने की लेखक द्वारा एक जायज और तर्कसंगत वजह दी गयी है। जोकि ध्रुव के चाहने वालों के लिए (मेरी ही तरह) हजम करना आसान होगा।
  • कॉमिक के संवाद काफी दमदार और जोशीले हैं। जैसे की "मुझसे लड़कर मुझे न अपना समय दो, न ही अपनी जान", "न दिल की धड़कन रुकने से, न पल्स के ख़त्म होने से, इंसान मरता है आस के खत्म होने से", "खून की कमी थी बस, अब तुहारा पीकर पूरी कर लुंगी"।

और अब अंत में इतना ही कहना चाहूंगा की, "नो मेंस लैंड" पाठकों को काफी पसंद आएगी। अगर आपने नहीं पढ़ी तो जरूर पढ़ें। 

Review - No Mans Land Pic 3
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  1. My view is that it seems hilarious that both dhruvas parents married each other with each ignorant of the others true identity and how such extraordinary persons
    ended up working in a circus. Radha seems to be a super spy but what could jacob be hiding in his circus that she had to go to such extreme measure of working as a circus acrobat to gain daily access to him and the circus grounds remains to be seen. Otherwise we can presume that a competent spy can easily overcome the security guards of a circus. However it does lead to Dhruvas character being more grounded in reality as he also must have had secret training from his mother which he must have thought was merely her acrobatic prowess. She could also have implanted in him the spy instincts of turning the enemy strengths into weaknesses and using even ordinary implements as weapons as all spies are provided such basic training. So it seems that it is his mother that turned dhruva into a super commando.

  2. Bc ye samjh me nahi ata ki logan 2017 movie vulvorine jo ki ek legend tha kutte ki maut q mara gaya bc

    1. Waise to wolverine ka "No Men Land" se koi lena dena nahin hai.
      lekin mujhe umeed hai wolverine ek baar fir se lotega.

    2. kyunki bhai unki movies reality ke najdik hoti hain, apne bollywood ki tarah nhi ki ek punch mein gaadiya aasman mein bhej de... Captain Marvel