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Review Doga Unmat

 Review Doga Unmat | Doga Unmulan 4 


Review Doga Unmat - Pic 1Your Ratings Please:                  



My Ratings: 4 /5        

RC Official Rating: N/A


Code: SPCL-2598-H
ISBN: 9789332424999
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Mandar Gangele, Sudeep Menon
Penciler: Dildeep Singh
Inker: Ishwar Arts, Swati Choudhary
Colorist: Shadab Siddiqui
Pages: 32
Price: Rs 40.00



The duplicate Doga is getting manic and is becoming a serious trouble for the people of Mumbai and as well as for Doga. On the other side, the only one who can root out this problem, the Doga (Suraj) is still unconscious. But Adrak Chacha got a vital clue, as a locket. How much crucial is this clue? The answer can only be given by the next part.


Review - Doga Unmat: 


Let's talk about the story, the pace of the story is quite good and the story is growing up fast enough. 6 incidents have shown very easily in this comic of just 25 pages and in a great way. From this you can guess about the pace of the story. Out of these six incidents, "the incident of Azaad Maidan" was large enough, but still we cannot say that this incident is missing a major scene. Or the comics have been completed in a hurry. Artist entitled to praise. 

Not only this comic, but the artwork of the entire series is great and admirable. The artwork of "Doga Unmulan Series" is much better than the other ongoing comics series "Aakhiri Rakshak" and "Rajnagar Rakshak". Look at the second page of the comic (because the first is the introduction page), you can find out the quality of the artwork.


Dialogues are simple but well written. They are according to the role of each character and are much balanced. Unnecessarily impact on the dialogues has not been tried anywhere.



Drawbacks of the Comic:

  • We have heard and read many times that the news media has show the news incorrectly. And now in comics too, media is showing incorrect news (:P). Take a look at this comic, "Follow-up Newspaper" made the headline "Humiliating defeat of Mumbai Police, Doga managed to dodge 100 policemen". As I said in the previous review of this comic series, "Inspector Teja arrives with only 6-7 constables to arrest Doga". Actually, only 6-7 policemen were on the spot and the newspaper mentioned 100.
  • Suraj remain unconscious for so long, it is inconceivable. I would like to draw readers' attention, Lomadi brings Doga to the "Lion Gym" and the very next day social worker Shohan Dasgupta speaks live to the "Fast News Channel". The next incident takes place at Azad Maidan, which is a few days later (roughly 3-4 days). Until that day, Suraj has still shown unconscious. The point to be noted here, Doga had ran to escape from the police and had fell on the garbage dump from a 3-4 storey building. Nevertheless, he was in a position to stand in front of Nirmulak. Fight between Doga and Nirmulak was a little, and the conversation was more. Nirmulk had hit Doga barely 4-5 times. Meanwhile, Lomadi had come between them. She saved Doga and had taken him to the Lion Gym. I'm trying to say that, Suraj remain unconscious from 3-4 days and I really did not understand why. Doga is seriously injured, it makes sense. He is not in condition to walk and is on complete bed rest, it also makes sense. But enough time has passed and Suraj has not come to his senses, it is beyond the understanding. Hope, the next part "Doga Ansh" will be answered it.
  • Social worker Sohan Dasgupta held a huge rally at Azad Maidan. Doga opened fire on this rally and murdered Sohan Dasgupta in front of the public. He could, because he is Doga. But the notable point is, for the protection of this rally only 8-10 policemen were present there. And those policemen who were present there were saying that, “we were not prepared for such a situation". And the biggest and important point, the main objective of organizing this rally was "to unite people for the elimination of Doga". After the recent violent behavior of Doga, How could the administration do such a huge mistake? If such a rally against Doga is being conducted, it should undergo Z category security or it should have maximally police protection. Doga is now out of control, who knows when and what he will do.

Strong side of the Comic:


  • The artwork of this comic is great and deserves praise. Pictures are made excellent.
  • The story is growing up with good pace, which is beneficial for both the series and the reader.

Overall, it is a fantastic and entertaining comic. Doga fans will surely like it. Doga Unmulan Series is gradually becoming interesting. Now, it’s interesting to read the next part "Doga Ansh", waiting eagerly for it.


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Story Doga Unmat - Pic


डोगा उन्मत - डोगा निर्मूलक 4 । राज कॉमिक्स  

बहरूपिया डोगा उन्मत्त होता जा रहा है और मुंबई के साथ साथ मुंबई के बाप के लिए एक बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जो इस मुसीबत को जड़ से उखाड़ सकता है, उस मुंबई के बाप डोगा यानि सूरज को अब तक होश नहीं आया है। लेकिन अदरक चाचा के हाथ एक अहम सुराग लगा है, एक लॉकेट के रूप में। अब ये सुराग कितना अहम साबित होता है, इसका जबाब केवल आगामी भाग ही दे सकता है।

समीक्षा - डोगा उन्मत:

रुख करते हैं कहानी की और, कहानी की गति काफी अच्छी है और कहानी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। आप अंदाजा लगा सकते हैं की 25 पृष्ठों की इस पूरी कॉमिक में 6 घटनाओं को बड़ी ही आसानी और बढ़िया तरीके से दिखाया गया है। इन 6 घटनाओं में से "आज़ाद मैदान वाली घटना" काफी बड़ी थी, लेकिन फिर भी हम ये नहीं कह सकते की उस घटना में कोई अहम दृश्य छूटा हो, या जल्दवाजी में कॉमिक पूरी की गयी है। आर्टिस्ट तारीफ़ के हकदार हैं।

डोगा उन्मत कॉमिक का ही नहीं बल्कि इस पूरी श्रृंखला का आर्टवर्क बढ़िया एवं सराहनीय है। इस पूरी श्रृंखला का आर्टवर्क मौजूदा चल रही अन्य श्रृंखलाओं "आखिरी रक्षक" और "राजनगर रक्षक" के मुकाबले काफी बेहतर है। क्यूंकि पहला परिचय पृष्ठ है इसलिए आप इस कॉमिक के दूसरे पृष्ठ को देखिये, आपको आर्टवर्क की गुणवत्ता का अंदाजा हो जाएगा।

संवाद हर किरदार की भूमिका के अनुसार हैं, नपेतुले हैं। कहीं भी बेवजह का प्रभाव डालने की कोशिश नहीं की गयी है। संवाद साधारण हैं लेकिन बढ़िया लिखे गए हैं।


कॉमिक्स की खामियां:
  • मीडिया का तो काम ही है, "ख़बरों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाना"। अब कॉमिक्स में भी मीडिया ख़बरों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहा है (:p)। इस कॉमिक में ही देख लीजिये "फॉलो-उप अखबार" ने हैडलाइन बना दी "मुंबई पुलिस की शर्मनाक हार, 100 पुलिस वालों को चकमा देने में डोगा कामयाब"। जैसा की मैंने पिछले भाग की समीक्षा में कहा था,  "इंस्पेक्टर तेजा केवल 6-7 हवलदारों के साथ डोगा को गिरफ्तार करने आता है"। असल में मोके पर केवल 6-7 पुलिस वाले ही थे और अखबार में 100 बताये गए हैं।।
  • सूरज का इतने लम्बे समय तक बेहोश रहना समझ से बाहर है। मैं पाठकों का ध्यान खींचना चाहूंगा, लोमड़ी डोगा को लायन जिम पहुंचाती है और ठीक उसके अगले दिन समाजसेवी शोहन दासगुप्ता फ़ास्ट न्यूज़ चैनल से लाइव बातचीत करते हैं। इससे अगली घटना है आज़ाद मैदान की, जोकि कुछ दिनों बाद की है (अंदाज़न ३-4 दिन)। उस दिन तक भी सूरज बेहोश ही दिखाया गया है। यहाँ गौर करने वाली बात यह है की, डोगा पुलिस से बचने के लिए भागा था और 3-4 मंजिली ईमारत से सीधा कूड़े के ढेर पर गिरा था। इसके बावजूद वह निर्मूलक के सामने खड़े रहने की स्तिथि में था। निर्मूलक और डोगा के बीच लड़ाई कम और बातचीत ज़्यादा हुई थी। निर्मूलक ने डोगा पर मुश्किल से 4-5 वार ही किये थे, इतने में लोमड़ी बीच में आ गयी और डोगा को बचाकर लायन जिम ले आई थी। मैं यहाँ पर ये कहना चाह रहा हूँ की सूरज के 3-4 दिन तक बेहोश रहने की वजह समझ में नहीं आई। डोगा गंभीर रूप से घायल है ये समझ आता है। चलने फिरने की हालत में नहीं है, बिस्तर पर है, ये भी समझ आता है। लेकिन इतना वक्त बीत जाने पर भी सूरज को होश न आना, यह बात बिलकुल भी समझ नहीं आई। उम्मीद है इसका जवाब अगले भाग "डोगा अंश" में शायद मिल जाए।
  • शोहन दासगुप्ता ने आज़ाद मैदान में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया। इस जनसभा पर डोगा ने गोलियां बरसाई और शोहन दासगुप्ता की सरेआम हत्या कर दी। वह डोगा है कर सकता है। लेकिन गौर करने वाली बात ये है की, इस जनसभा में सुरक्षा या पुलिस व्यवस्था के नाम पर दर्जन भर पुलिस वाले भी नहीं थे। जो थे वह कह रहे हैं की हमने ऐसी स्तिथि के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। और सबसे बड़ी और अहम बात, इस जनसभा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य था "डोगा के उन्मूलन के लिए लोगों को एकजुट करना"। डोगा के हालिया हिंसक बर्ताव के बाद, प्रशासन इतनी बड़ी चूक कैसे कर सकता है? अगर डोगा के खिलाफ ऐसी कोई जनसभा आयोजित की जा रही है, तो उसे जेड श्रेणी सुरक्षा मुहैया करवानी चाहिए थी, या फिर उसे ज़्यादा से ज़्यादा पुलिस सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। क्यूंकि डोगा तो बेकाबू हो चुका है, उसकी क्या भरोसा कब क्या कर जाए।


कॉमिक के मजबूत पक्ष:
  • इस कॉमिक का आर्टवर्क उम्दा है और काबिले तारीफ है। चित्र बहुत ही बढ़िया बने हैं।
  • कहानी काफी अच्छी गति से आगे बढ़ रही है, जोकि श्रृंखला और पाठक दोनों के लिए फायदेमंद है।

कुल मिलकर, यह एक बढ़िया और मनोरंजक कॉमिक है। डोगा के प्रशंसकों को यह ज़रूर पसंद आएगी। डोगा उन्मूलन श्रृंखला दिलचस्प होती जा रही है। आगामी भाग "डोगा अंश" का बेसब्री से इन्तजार रहेगा।


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My Ratings: 4/5

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