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Review Vishwa Rakshak Raj Comics

 Review Vishwa Rakshak | Akhiri Rakshak 4: 


Review Vishwa Rakshak - Pic 1Your Ratings Please:                  



My Ratings: 3.5 /5        
RC Official Rating: N/A

Code: SPCL-2604-H
ISBN: 9789332425507
Language: Hindi
Author: Nitin Mishra
Penciler: Dheeraj Verma
Colorist: Bhakt Ranjan
Pages: 32
Price: 40.00


Review Vishwa Rakshak:


"Vishwa Rakshak" the fourth part of the 'Aakhiri Rakshak Series', the better and best one among all the four parts. Reason, in the previous three parts readers were getting action, action and only the action. While in this comic the story has also grown along with the action. This series raises many questions in the mind of a reader, and "Vishwa Rakshak" has been somewhat successful to answer some of these. As well as, a few new questions full of curiosity have also emerged in this comic. While fighting aliens, Nagraj is shown releasing some kind of new power from his hands. The nuclear powers of Parmanu only multiplied, but Nagraj got a new power. It sounds something similar while looking at this scene. Usually Hawthorn snakes come out of Nagraj's hand and to explode the target the Saboteur snakes come out from the mouth of the Hawthorn snakes. But in this comic, is there a mistake in these pictures? Or Nagraj has got a new power? The upcoming parts of the series can only give the answer.

Coming to the story, the story of this comic got a little momentum, and this is in the favor of both the reader and this series. A few more Heroes and some more incidents are also added to the story. Now it will be interesting to see how the author will interconnect all the heroes and the incidents in the story.

Artwork still does not show any improvement. The pictures, inking, coloring all are the same as the previous parts. I must say that, "If the increase in amount has a negative impact on the quality, then it is not a good deal at all". Raj Comics team and the readers both should understand this.
Comic dialogues are ordinary and average. Like any other ordinary comics dialogues, nothing special.


Drawbacks of the Comic:

  • Artwork is very weak and is needed more effort. Drawing is needed to be improved much more.
  • In the previous part "Brahmand Yoddha" Kaara, Dhruv and Parmanu reaches up to the machine, from where it had all began. Kaara says that, Uttarjeevi has originated from this machine and now Parmanu must enter within this machine. But then suddenly the Universe Warrior (Brahmaand Yoddha) attacked them. But in this part when all the "Universe Warrior" has fled, Kaara and Parmanu forget their main purpose and are busy doing other things. I mean, the purpose for which Kara, Parmanu and Dhruv have came back to New Delhi, now they have forgotten that purpose.
  • "The mighty army of the Universe Warriors" has comes to eliminate Parmanu. But when Nagraj came to the fight, this army was running down his tail. This army of different powerful Universe Warriors appeared like an army of fugitives instead of a Warrior army. Here 'Warrior' and 'Powerful' both these words were not suitable at all for this army.
  • The Combatants of Maktriyam Planet were also a part of this army of "Universe Warriors", their defeat did not make sense. Because it was clear in previous part, that any energy attacks like Parmanu's atomic power could not harm these Maktriyam combatants. While in this battle, Nagraj and Parmanu both used energy attacks and the Universe Warriors forced to flee.


Comic's strong side:

  • The questions of the previous parts are answered substantially in this comic. This is very important to maintain the reader’s interest. At least now the reader knows, from where it had all began.
  • The pair of the Deadman and the Ghost is really awesome. The entry of this pair in Aakhiri Rakshak series would be undoubtedly interesting. And I think this pair, the duo of Anthony and Pret Uncle (Jacob) could be used to start some other comics series. This pair has the potential and there are strong possibilities of its success.
  • As I said in previous reviews of Brahmand Yoddha, "Whatever the situation or the comic is, the entry and the role of Nagraj is always tremendous". And now the story has gained momentum after the entry of Nagraj in this series. From the entry of Nagraj, the readers are also delighted like Parmanu.
  • Overall we can say "Vishwa Rakshak" has lifted this series. Now we will eagerly wait for the upcoming parts of this series. Hope that, it will not wait longer and not be in vain.



You might also like to Read:
 
Review - Brahmand Yoddha

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Review Vishwa Rakshak - Pic 2

 समीक्षा विश्व रक्षक | आखिरी रक्षक 4 

समीक्षा:

"आखिरी रक्षक श्रृंखला" की यह कॉमिक 'विश्व रक्षक' अब तक रिलीज़ हुए चारों भागों में सबसे बेहतर और बढ़िया साबित हुई है। कारण, पिछले तीनों भागों में केवल एक्शन, एक्शन और एक्शन ही था। जबकि इस कॉमिक्स में एक्शन के साथ साथ कहानी भी आगे बढ़ी है। इस श्रृंखला को लेकर पाठक के दिमाग में उठते कई सारे सवालों में से, कुछ के जवाब देने में ये कॉमिक कुछ हद तक सफल रही है। साथ ही कुछ और नए एवं उत्सुकता से भरे सवाल भी सामने आये हैं। एलियंस से लड़ते वक़्त नागराज हाथों से ऊर्जा छोड़ता हुआ दिखाया गया है। परमाणु की शक्तियां तो केवल बहुगुणित ही हुई हैं, लेकिन नागराज को तो एक नयी शक्ति मिल गयी। इस दृस्य को देखने पर तो कुछ ऐसा ही लगा। आमतौर पर नागराज के हाथो से नागफनी सर्प बाहर आते हैं, और नागफनी सर्प अपने मुंह से ध्वंसक सर्प निकालकर अपने लक्ष्य पर विस्फोट करते हैं। लेकिन इस कॉमिक में, क्या ये चित्र में हुई एक गलती है? या फिर नागराज को एक नयी शक्ति मिल गयी है? इसका जवाब तो इस श्रृंखला के आने वाले भागों में ही मिलेगा।

कहानी पर आते हैं, इस कॉमिक में कहानी ने थोड़ी गति पकड़ी है, जोकि पाठक और इस श्रृंखला दोनों ही के पक्ष में है। कुछ और हीरोज और घटनाक्रम इस कहानी में जुड़ गए हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा की लेखक इस कहानी में किस तरह से इन सब हीरोज और घटनाओं का तालमेल बिठाता हैं।

आर्टवर्क में अभी भी कोई सुधर हुआ नहीं दिखा। चित्र, इंकिंग, रंगसज्जा सब कुछ पिछले भागों जैसे ही हैं। मैं यहाँ ये ज़रूर कहना चाहूंगा की "यदि मात्रा में बढ़ोतरी होने से गुणवत्ता पर असर पड़ता है तो ये किसी भी तरह से फायदे का सौदा नहीं है"। ये बात राज कॉमिक्स टीम और पाठक दोनों को समझनी चाहये।

कॉमिक के संवाद साधारण एवं औसत हैं। किसी भी आम कॉमिक के संवादों की ही तरह, कोई ख़ास प्रभावी नहीं।


कॉमिक की खामियां:

  • आर्टवर्क काफी कमजोर है और अधिक मेहनत की ज़रूरत है। चित्रांकन में बहुत अधिक सुधार की ज़रूरत है।
  • पिछले भाग "ब्रह्माण्ड योद्धा" में, कारा ध्रुव और परमाणु के साथ उस मशीने तक पहुँचती है जहाँ से यह सब शुरू हुआ था। कारा कहती है की इसी मशीने से ही उत्तरजीवी की उत्पति हुई है और अब परमाणु को इसी मशीने के भीतर प्रवेश करना होगा। लेकिन तभी ब्रह्माण्ड योद्धाओं का हमला हो जाता है और ध्रुव ट्रांसफ्यूज़ हो जाता है। लेकिन इस भाग में जब सारे ब्रह्माण्ड योद्धा भाग चुके हैं, तो कारा और परमाणु अपने मुख्य मकसद को छोड़ कर बातों में व्यस्त हैं। मेरे कहने का मतलब है की जिस उद्देश्य को लेकर कारा, ध्रुव और परमाणु वापस नयी दिल्ली आये थे, अब वह उस मकसद को ही भूल रहे हैं।
  • "परमाणु को समाप्त करने पहुंची ब्रह्माण्ड योद्धाओं की शक्तिशाली सेना", लेकिन नागराज के सामने आने पर इस सेना की शक्ति को मानो जंग ही लग गया। ब्रह्माण्ड के विभिन्न शक्तिशाली योद्धाओं की यह सेना कम और भगोड़ों की फौज ज़्यादा नजर आई। यहाँ 'योद्धा' और 'शक्तिशाली' ये दोनों ही शब्द इस सेना के लिए बिलकुल भी उपयुक्त नहीं लगे।
  • ब्रह्माण्ड योद्धाओं के सेना में मेकट्रायम ग्रह के अत्याधुनिक लड़ाके भी शामिल थे और उनके हारने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। क्यूंकि पिछले भाग में ये साफ़ बताया गया है की परमाणु की एटॉमिक पावर्स जैसा कोई भी ऊर्जा हमला मेकट्रायम ग्रह के लड़ाकों को कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकता। जबकि इस लड़ाई में नागराज और परमाणु दोनों ने ही ऊर्जा हमलों का प्रयोग कर ब्रह्माण्ड योद्धाओं को भागने पर मजबूर किया।


कॉमिक के मजबूत पक्ष:

  • इस श्रृंखला के पिछले भागों के सवालों के जवाब इस कॉमिक में काफी हद तक मिले। जोकि एक पाठक की रूचि को बनाए रखने के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। कम से कम पाठकों को यह तो ज्ञात हुआ की इस सारी मुसीबत की शुरुआत कहाँ से हुई।
  • मुर्दे और प्रेत की जोड़ी सच में लाजवाब है। आखिरी रक्षक श्रृंखला में इस जोड़ी का आगमन निस्संदेह ही दिलचस्प होगा। केवल इसी जोड़ी को लेकर एक अन्य कॉमिक्स श्रृंखला भी बनाई जा सकती है और उसकी सफलता की सुदृढ़ संभावनाएं हैं।
  • जैसा की मैंने "ब्रह्मांड रक्षक" की समीक्षा में कहा था, "चाहे कुछ भी हो लेकिन नागराज की एंट्री और उसकी भूमिका हमेशा जबरदस्त होती है"। इस श्रृंखला में भी नागराज की एंट्री के बाद से कहानी को गति मिली है। नागराज के इस कॉमिक की कहानी में प्रवेश करने से, परमाणु की ही तरह पाठक भी उत्साहित हुए हैं।


कुलमिलाकर ये कहा जा सकता है की "विश्व रक्षक" ने इस श्रृंखला में जान डाल दी है। अब आगामी भाग "अदृश्य षड़यंत्र" का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा। उम्मीद है की यह इन्तजार अधिक लम्बा न हो और ना ही व्यर्थ साबित हो।



 

Review Vishwa Rakshak - Pic 3



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